ॐ नमः शिवाय

आरती श्री जटाशंकर भगवान ।

ओम जय शिव महादेवा जय जटाशंकर देवा।
ब्रम्हा विष्णु सुरादिक सदा करत सेवा।। ओम जय........

सेवत सांझ सवेरे सुर मुनि ध्यान धरें।
जोगी जती सन्यासी बंदन संत करें।। ओम जय........

जटन गंज त्रिवेणी पति पावन गंगा।
काया कंचन करती मन करती चंगा।। ओम जय........

आस लगा जो दारिद दीन दुखी आये।
कभी तुम्हारे दर से निष्फल न जाये।। ओम जय........

दानन में महादानी वरदानी भोले।
किए काज सवही के जो हर हर वम बोले।। ओम जय........

"निराधार " जो कूर कुकर्मी ध्यान धरें ध्यावै।
अंत वास शिवपुर में पापी पा जावै।। ओम जय........

लेखक - पं० शंकर प्रसाद तिवारी "निराधार "